पतियों की हत्या के बढ़ते मामले समाज के लिए एक गंभीर चिंता का विषय बनते जा रहे हैं। साल 2025 और 2026 की शुरुआत में कई ऐसी खौफनाक घटनाएं सामने आईं जिन्होंने रिश्तों की पवित्रता पर सवाल खड़े कर दिए। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के पिछले कुछ सालों के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि भारत में हर साल औसतन 150 से 200 के बीच पतियों की हत्या उनकी पत्नियों या उनके सहयोगियों द्वारा की जाती है।
पिछले एक साल (2025-2026) के कुछ प्रमुख और सनसनीखेज मामले नीचे दिए गए हैं:
🚨 पिछले 1 साल के चर्चित मामले (नाम और विवरण के साथ)
| आरोपी पत्नी का नाम | मृतक पति का नाम | स्थान | घटना का संक्षिप्त विवरण (2025-26) |
|---|---|---|---|
| अंजलि (23) | आशीष | श्रीगंगानगर, राजस्थान | फरवरी 2026: शादी के मात्र 3 महीने बाद अपने प्रेमी के साथ मिलकर पति की हत्या करवाई। |
| मुस्कान (27) | सौरभ (मर्चेंट नेवी) | मेरठ, उत्तर प्रदेश | मार्च 2025: प्रेमी के साथ मिलकर हत्या की, लाश के टुकड़े कर सीमेंट के ड्रम में बंद कर दिया। |
| सोनम रघुवंशी | राजा रघुवंशी | मेघालय | मई 2025: हनीमून के दौरान पति की हत्या की साजिश रची और किराए के हत्यारों से कत्ल करवाया। |
| सोनिया | प्रीतम | दिल्ली/सोनीपत | अगस्त 2025: प्रेमी के साथ मिलकर पति की हत्या की और लाश को सोनीपत के नाले में फेंक दिया। |
| एस. शिरीषा (28) | किशन नायक | हैदराबाद | मई 2025: घरेलू विवाद के चलते पति का गला घोंटकर हत्या की और बीमारी का बहाना बनाया। |
| गोपाली देवी | धन्नालाल सैनी | जयपुर, राजस्थान | दिसंबर 2025: 5 साल से चल रहे अवैध संबंधों के चलते प्रेमी के साथ मिलकर पति को मार डाला। |
📉 मुख्य कारण और आंकड़े
विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स और पुलिस जांच के अनुसार, इन हत्याओं के पीछे मुख्य रूप से तीन कारण सामने आए हैं:
* अवैध संबंध (Extra-marital Affairs): लगभग 70% मामलों में पत्नी का किसी अन्य व्यक्ति के साथ संबंध हत्या की मुख्य वजह बना।
* घरेलू हिंसा और प्रताड़ना: कुछ मामलों में लंबे समय से चल रही शारीरिक या मानसिक प्रताड़ना के प्रतिशोध में पत्नियों ने यह कदम उठाया।
* संपत्ति और वित्तीय विवाद: बीमा राशि या संपत्ति हड़पने के उद्देश्य से भी कुछ घटनाएं अंजाम दी गईं।
> NCRB की एक रिपोर्ट के अनुसार: पिछले 5 वर्षों में भारत में लगभग 785 पतियों की जान उनकी पत्नियों ने ली है। पुरुष अधिकार संगठनों का दावा है कि पुरुषों के खिलाफ घरेलू हिंसा के लिए कड़े कानून न होने के कारण ऐसे मामलों में वृद्धि हो रही है।
>
निष्कर्ष
ये घटनाएं दर्शाती हैं कि अपराध का कोई जेंडर नहीं होता। समाज में नैतिक मूल्यों में गिरावट और आपसी विश्वास की कमी ऐसे जघन्य अपराधों को जन्म दे रही है। कानून को सभी के लिए समान रूप से निष्पक्ष होना अनिवार्य है।
क्या आप इन मामलों से संबंधित कानूनी पहलुओं या पुरुष अधिकारों से जुड़ी संस्थाओं के बारे में और जानकारी चाहते हैं?
0 Comments