हरियाणा के गांवों में 'चौधर' की लड़ाई सिर्फ इज्जत की नहीं, बल्कि उस भारी-भरकम बजट की भी है जो विकास के नाम पर आता है लेकिन अक्सर सरपंचों और अधिकारियों की जेबों में चला जाता है। सरकारें बदलती हैं, लेकिन गांवों में भ्रष्टाचार का तरीका वही पुराना है।
भ्रष्टाचार के मुख्य तरीके (Modus Operandi):
टाइलों का खेल: जिस गली में जरूरत नहीं, वहां भी बार-बार इंटरलॉकिंग टाइलें बिछाना। कच्ची सामग्री का इस्तेमाल और पक्के बिल।
कागजी निर्माण: जो तालाब या दीवार 5 साल पहले बनी थी, उसी की मरम्मत दिखाकर दोबारा पैसा निकाल लेना।
सोलर लाइट और जिम: बाजार भाव से दोगुने दाम पर घटिया क्वालिटी की सोलर लाइटें और ओपन जिम का सामान खरीदना।
फर्जी मस्टर रोल: मनरेगा या गांव के काम में उन मजदूरों के नाम लिखना जो कभी काम पर आए ही नहीं।
📊 हकीकत बयां करते आंकड़े (The Reality in Numbers)
सिर्फ बातों से नहीं, इन आंकड़ों से समझिए भ्रष्टाचार की गहराई:
रिकवरी नोटिस (Recovery Notices): पिछले कार्यकाल (2016-2021) के बाद हुए 'सोशल ऑडिट' और जांच में हरियाणा सरकार ने सैकड़ों पूर्व सरपंचों को नोटिस भेजा। एक रिपोर्ट के अनुसार, अकेले हिसार और करनाल जैसे जिलों में करोड़ों रुपये के गबन के मामले सामने आए, जिनकी रिकवरी के आदेश दिए गए।
ई-टेंडरिंग का विरोध क्यों?: सरकार ने जब 2 लाख (बाद में 5 लाख) से ऊपर के कामों के लिए ई-टेंडरिंग (E-Tendering) अनिवार्य की, तो इसका भारी विरोध हुआ।
सवाल: अगर ईमानदारी से काम करना है, तो ठेकेदारी सिस्टम और पारदर्शिता से डर कैसा? यह विरोध ही बताता है कि 'मैनुअल पावर' (हाथ में पैसा) जाने का डर कितना बड़ा था।
शिकायतों का अंबार: सीएम विंडो (CM Window) पर आने वाली शिकायतों में एक बड़ा हिस्सा पंचायती राज विभाग के खिलाफ होता है, जिसमें गबन, पक्षपात और घटिया निर्माण की शिकायतें प्रमुख हैं।
भौतिक सत्यापन में फेल: कई बार स्टेट विजिलेंस या क्वालिटी मॉनिटर की जांच में पाया गया कि कागजों पर जो सड़क "नई" बनी है, मौके पर वह 6 महीने में ही टूट गई।
निष्कर्ष:
जब तक गांव का आम नागरिक आरटीआई (RTI) और 'ग्राम सभा' की ताकत को नहीं समझेगा, तब तक लोकतंत्र की सबसे छोटी इकाई में यह लूट जारी रहेगी। सरपंच चुनते वक्त 'भाईचारा' नहीं, 'ईमानदारी' देखिए।
आपकी राय: क्या आपके गांव में भी गलियां सिर्फ कागजों पर बनती हैं? कमेंट में बताएं। 👇

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