श्री ओमप्रकाश चौटाला जी पर दो बड़े आपराधिक मुकदमे

 



हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री श्री ओमप्रकाश चौटाला जी का 20 दिसंबर 2024 को निधन हो गया है। भारतीय कानून के अनुसार, किसी व्यक्ति के निधन के बाद उस पर चल रहे आपराधिक मुकदमे आमतौर पर बंद (abate) हो जाते हैं।

हालांकि, उनके राजनीतिक जीवन में उन पर कई मुकदमे और आरोप लगे थे। मुख्य रूप से दो बड़े मामलों में उन्हें अदालत द्वारा दोषी करार दिया गया और सजा सुनाई गई थी, जबकि कुछ अन्य ऐतिहासिक मामले भी चर्चा में रहे।

यहां उनके प्रमुख मुकदमों की पूरी जानकारी दी गई है:

1. जेबीटी (JBT) शिक्षक भर्ती घोटाला (सबसे बड़ा मामला)

यह उनके खिलाफ सबसे चर्चित और गंभीर मामला था।

  • क्या था मामला: वर्ष 1999-2000 में हरियाणा में 3,206 जेबीटी (Junior Basic Training) शिक्षकों की अवैध भर्ती की गई थी। आरोप था कि मेरिट लिस्ट में हेराफेरी कर चहेते लोगों को नौकरी दी गई।

  • सजा: जनवरी 2013 में दिल्ली की रोहिणी कोर्ट ने उन्हें दोषी ठहराया और 10 साल की सजा सुनाई।

  • परिणाम: इस सजा के कारण वे लंबे समय तक तिहाड़ जेल में रहे। अपनी सजा पूरी करने के बाद वे 2021 में रिहा हुए थे।

2. आय से अधिक संपत्ति का मामला (Disproportionate Assets Case)

  • क्या था मामला: सीबीआई (CBI) ने आरोप लगाया था कि 1993 से 2006 के बीच उन्होंने अपनी ज्ञात आय से बहुत अधिक संपत्ति अर्जित की। यह संपत्ति उनकी वैध आय से करीब 189% ज्यादा (लगभग 6.09 करोड़ रुपये) बताई गई थी।

  • सजा: मई 2022 में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने उन्हें इस मामले में भी दोषी करार दिया और 4 साल की सजा सुनाई। साथ ही उन पर 50 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया और उनकी 4 संपत्तियों को जब्त करने का आदेश दिया गया।

3. अन्य ऐतिहासिक विवाद और मामले

इन दो सजा-याफ्ता मामलों के अलावा, उनके जीवन में कुछ अन्य पुराने मामले भी सुर्खियों में रहे:

  • घड़ी तस्करी का मामला (1978): यह उनके राजनीतिक करियर के शुरुआती दौर का मामला था। 1978 में उन्हें दिल्ली एयरपोर्ट पर कलाई घड़ियों (wrist watches) की कथित तस्करी के आरोप में रोका गया था। उस समय उनके पास से कई विदेशी घड़ियां मिली थीं। इस घटना के बाद उनके पिता चौधरी देवीलाल ने उन्हें कुछ समय के लिए सार्वजनिक रूप से बेदखल भी कर दिया था।

  • ** महम कांड (1990):** रोहतक की महम विधानसभा सीट पर उपचुनाव के दौरान हिंसा हुई थी और निर्दलीय प्रत्याशी अमीर सिंह की हत्या हो गई थी। इस घटना के बाद भारी राजनीतिक बवाल हुआ और आयोग (Saikia Commission) ने उनकी सरकार की आलोचना की, जिसके चलते उन्हें मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था।

निष्कर्ष: मुख्य रूप से श्री ओमप्रकाश चौटाला जी पर दो बड़े आपराधिक मुकदमों (JBT घोटाला और आय से अधिक संपत्ति) में दोष सिद्ध हुआ था और उन्हें जेल की सजा काटनी पड़ी थी। उनके निधन के समय वे इन कानूनी लड़ाइयों से मुक्त हो चुके थे या मामले उनकी मृत्यु के साथ समाप्त हो गए।

Post a Comment

0 Comments